भारत में कृषि की तस्वीर बदलता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चैटबॉट

कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चैटबॉट कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चैटबॉट

मानव जाति के इतिहास में कृषि सबसे पुराना और सबसे महत्वपूर्ण पेशा है। कृषि गतिविधियां कब, किस तारीख को और कैसे शुरू हुईं इसका ठीक ठीक हिसाब बताना मुश्किल है। लेकिन समय के साथ कृषि में आए बदलावों को हम सभी ने अच्छी तरह से देखा है। बढ़ती जनसंख्या के साथ, कृषि उत्पादों की मांग भी तेजी से बढ़ी है, लेकिन मांग और आपूर्ति में भारी अंतर है। इसने कृषि क्षेत्र में नवाचार और प्रौद्योगिकी के लिए रास्ते खोले हैं।

कृषि उद्योग ने AI और मशीन लर्निंग को खुले हाथ से स्वीकार भी किया है। कृषि में तकनीक के इस्तेमाल से न सिर्फ उपज बढ़े हैं बल्कि उनकी गुणवत्ता में सुधार करने में भी मदद मिली है। अब जाहिर है कि जब तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा तो उसके साथ और उसके उपयोग में आने वाली समस्याएं भी बढ़ेंगी। इसलिए यूजर को तुरंत तकनीकी सहायता प्रदान करने के मकसद से चैटबॉट का इस्तेमाल किया जाने लगा है। चैटबॉट्स सुविधाजनक हैं और किसानों को उनकी समस्याओं का तथ्यों के आधार पर त्वरित समाधान प्रदान करते हैं। मशीन लर्निंग की मदद से आज चैटबॉट इतने परिष्कृत हैं कि वे किसानों की हर तरह की समस्याओं का जवाब देते हैं।

मशीन लर्निंग, चैटबॉट, ड्रोन और इंटेलिजेंट मॉनिटरिंग सिस्टम के साथ साथ एग्रीकल्चरल रोबोटिक्स भी इस क्षेत्र में अपना रास्ता बना रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने अल्ट्रा प्रिसिजन एग्रीकल्चर के अगले चरण में प्रवेश किया है। आइए कृषि में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चैटबॉट के कुछ लाभों पर नज़र डालें:

1. इमेज रिकॉग्निशन

इमेज रिकॉग्निशन मशीन लर्निंग की बुनियाद है। यह विभिन्न फसलों की पहचान करने में मदद करता है। साथ ही उपयोग किए जा रहे उर्वरकों और कीटनाशकों की पहचान करने में भी मदद करता है। इमेज रिकॉग्निशन किसानों को फसल के स्वास्थ्य का पता लगाने, विटामिन की कमी की जांच करने और समग्र फसल गुणवत्ता का आकलन करने में सक्षम बनाती है।

2. चैटबॉट सहायता

चैटबॉट किसानों की हर समस्या को सरल तरीके से उनतक पहुंचाता है। इसके जरिए किसानों को अपनी समस्या के समाधान के लिए किसी भी तरह के जटिल सूचना चैनल तक जाने की जरूरत नहीं होती। चैटबॉट को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग से मिले डेटा के जरिए समय समय पर अपडेट किया जाता है। वे प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (natural language processing) के जरिए विकसित किए जाते हैं और क्षेत्रीय भाषाओं सहित कई भाषाओं को समझ सकते हैं। चैटबॉट किसानों द्वारा उठाए गए प्रश्नों के लिए तत्काल सहायता प्रदान करते हैं या उन्हें एक कुशल व्यक्ति से जुड़ने में मदद करते हैं।

3. मिट्टी की जांच

मिट्टी किसी भी कृषि प्रक्रिया की नींव होती है। बार-बार खेती करने से भूमि की गुणवत्ता में गिरावट आती है और समय के साथ पोषण मूल्य कम होता जाता है। इससे मिट्टी अनुपयोगी हो जाती है। लगातार जुताई करने से भूमि और फसल दोनों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एआई (AI) से लैस तकनीक मिट्टी की जांच करती है और मिट्टी में मौजूद शिकायतों की पहचान करती है। साथ ही अनुकूल समाधान देती है और मिट्टी की सेहत में सुधार लाने के और उसमें हो रही प्रगति का विश्लेषण करती है।

4. ड्रोन के जरिए फसलों का विश्लेषण

कृषि उद्योग में आज ड्रोन का इस्तेमाल खुलकर किया जाता है। इनका उपयोग फसलों के स्वास्थ्य का मूल्यांकन करने, सिंचाई और वन्यजीवों की निगरानी के लिए किया जाता है। इतना ही नहीं इनके जरिए आपदा निगरानी में भी मदद मिलती है। इसकी एक खासियत ये है कि किसान घर बैठे भी सिस्टम लगाकर अपने खेतों पर नजर रख सकते हैं। ड्रोन का इस्तेमाल खाद के छिड़काव के लिए भी किया जाता है।

5. मौसम की भविष्यवाणी

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने में मदद करता है। इससे किसानों को हवा की गति, नमी, बारिश आदि से अवगत होने में मदद मिलती है। किसान मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए तदनुसार फसल लगा सकते हैं।

एआई (AI), एमएल (ML) और चैटबॉट जैसी स्वचालित प्रक्रियाओं ने कृषि क्षेत्र में कई बदलाव लाए हैं। डेटा साइंस, डेटा मॉनिटरिंग और डेटा प्रोसेसिंग अब कम से कम समय में अधिकतम लाभ और एआई (AI) के नेतृत्व वाली तकनीक के साथ न्यूनतम संभव समय में किया जाता है। इससे कृषि उपज को बढ़ाने में मदद मिलती है। जैसे-जैसे उत्पादकता बढ़ती है, देश भर की मंडियों में अधिक से अधिक फसलें पहुँचती हैं। इससे विभिन्न मंडियों में कमीशन एजेंट का काम भी बढ़ जाएगा। उन्हें मंडी एकाउंटिंग से जुड़े कई काम जैसे बिल बनाना, इन्वेंट्री प्रबंधन और भुगतानों पर नज़र रखने में अधिक समय लगाना होगा। मंडी एकाउंंटिंग में कमीशन एजेंट की चिंताओं को समझते हुए और उन्हें अवसरों में बदलने के लिए, भारत का नंबर 1 एग्रीट्रेडिंग ऐप बीजक, एक मंडी एकाउंटिंग समाधान के साथ आया है जिसे चार्ज ERP कहा जाता है।

चार्ज ERP ही है समाधान

चार्ज ERP एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर कृषि मंडियों में कमीशन एजेंटों के मंडी एकाउंटिंग को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। यह क्लाउड पर आधारित सॉफ्टवेयर, एजेंट के काम के बोझ को कम करने के उद्देश्य से बनाया गया है। चार्ज ERP भारत में उपलब्ध सबसे आसान ऑनलाइन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर है। इस प्लेटफॉर्म के कई लाभों में से एक यह है कि इसे कहीं से भी और कई उपकरणों से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के साथ डेटा सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही इसको इस्तेमाल करने लिए किसी प्रकार की तकनीकी या एकाउंटिंग विशेषज्ञता की आवश्यकता नहीं होती है।

यदि आप इसके बारे में और जानकारी चाहते हैं, तो बेझिझक +91 9311341199 डायल करें या फिर www.chargeerp.com पर जाएँ और आज ही अपना फ्री डेमो बुक करें। हमारे अपडेट के लिए आप चाहें तो हमें फेसबुक और यूट्यूब पर फॉलो पर भी कर सकते हैं।