हफ्ते की 10 बड़ी खबरें (14 नवम्बर से 20 नवम्बर)

Weekly round-up of the top 10 news Weekly round-up of the top 10 news

क्या आप जानते हैं कि हमारे देश के कृषि क्षेत्र में आजकल क्या हो रहा है? हम आपके लिए 10 प्रमुख ख़बरों का राउंड-अप लेकर आए हैं।

1.गुजरात का डांग जिला होगा 100% जैविक खेती वाला जिला

गुजरात सरकार जल्द ही पूर्वी गुजरात के आदिवासी बहुल जिला डांग को 100% जैविक खेती वाला जिला घोषित करने की तैयारी में है। राज्य के कृषि मंत्री राघवजी पटेल ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग न करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। साथ ही, वे उन्हें जैविक खेती के तरीकों को अपनाने के लिए ₹ 10,000 प्रति हेक्टेयर के हिसाब से अधिकतम दो हेक्टेयर की सब्सिडी प्रदान कर रही है। यहाँ और पढ़ें

2. चीनी उत्पादन 21 लाख टन पर 24% बढ़ा

महाराष्ट्र और कर्नाटक में इस बार चीनी का बंपर उत्पादन हुआ है। इसके कारण भारत का कुल चीनी उत्पादन भी 24% बढ़ गया है। हालांकि, भारतीय चीनी मिल संघ (ISMA) के मुताबिक, मिलों ने 25 लाख टन स्वीटनर के निर्यात का कॉन्ट्रैक्ट किया हुआ है। मौजूदा 2021-22 सीजन में (15 नवंबर तक) चीनी का उत्पादन 20.90 लाख टन है, जो पिछले साल 16.82 लाख टन था। हालांकि इसके पीछे एक कारण दक्षिण और पश्चिम भारत के कई चीनी मिलों द्वारा समय से पहले काम करना शुरू करना भी रहा है। यहाँ और पढ़ें

3. कॉफी उत्पादकों द्वारा बैंक ऋण के पुनर्निर्धारण की मांग

कर्नाटक प्लांटर्स एसोसिएशन ने केंद्र से सात साल की अवधि में, उत्पादकों द्वारा लिए गए ऋण की अवधि को पुनर्निधारित करने का आग्रह किया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष एस अप्पादुरई और सचिव अनिल सावूर डी ने एक संवाददाता सम्मेलन में बारिश के कारण हो रहे संकट से उभरने के लिए राहत मांगी है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन पुनर्निधारित ऋणों पर 10% की वार्षिक ब्याज दर रखी जाए, लेकिन बोझ को केंद्र, बैंकों और उत्पादकों को समान रूप से साझा किया जाना चाहिए। यहाँ और पढ़ें

4. बिहार के मखाने को मिलेगा GI टैग

बिहार के प्रसिद्ध मखाना या फॉक्स नट्स को जल्द ही ‘बिहार का मखाना’ के रूप में GI टैग मिल सकता है। इसके बाद बड़ी मात्रा में मखाने का निर्यात किया जा सकेगा, जिसका सीधा फायदा राज्य के किसानों को मिलेगा। इस विषय में, केंद्र सरकार ने पटना में अपनी बैठक की थी और आवश्यक कार्य तय किए थे। GI टैग मिलने के बाद मखाना कहीं से भी बेचा जा सकता है। वहीं, कोई अन्य राज्य इस उत्पाद पर दावा नहीं कर पाएगा। यहाँ और पढ़ें

5. कॉफी की पत्तियां बनी कॉफी उत्पादकों की आय का नया स्रोत

अब पूरे साल कॉफी उत्पादक अपने पौधों से अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकेंगे। मैसूर स्थित CFTRI (सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट) ने कॉफी की पत्तियों से स्वास्थ्यवर्धक उत्पादक तैयार करने का तरीका खोज निकाला है। इस तकनीक के जरिए सालों भर मौजूद रहने वाले कॉफी के पत्तों का इस्तेमाल किया जाएगा। कॉफी भले ही साल के कुछ महीनों में ही मिलती हो लेकिन पत्तियां तो हमेशा होती है। इसलिए ये तकनीक कॉफी बगान के मालिकों के लिए आर्थिक तौर पर फायदे का सौदा साबित होगी। यहाँ और पढ़ें

6. उर्वरक की कमी से केरल का चाय बागान क्षेत्र चिंतित

केरल के चाय बागान क्षेत्र ने उर्वरक की कमी पर चिंता व्यक्त की है। चाय बागानों में यूरिया और एमओपी की भारी कमी हो गयी है। चाय निर्माण कंपनी के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि उर्वरकों की इस कमी के चलते चाय क्षेत्र प्रभावित हो रहा है। इस वजह से बगान मालिक पौधों को जरूरी खाद नहीं दे पा रहे हैं। और इसकी वजह से पौधे कमजोर हो रहे हैं। इससे फसलों की उत्पादकता पर भी असर पड़ेगा। साथ ही, लागत बढ़ेगी और कंपनियों को काफी नुकसान होगा। यहाँ और पढ़ें

7. 250 साल पुराने पेड़ को ऐतिहासिक पेड़ का दर्जा

बेंगलुरु से 40 किलोमीटर दूर स्थित 250 साल पुराने कटहल के पेड़ को कर्नाटक का सबसे पुराना पेड़ माना जाता है। हालांकि यह पेड़ सिर्फ कर्नाटक का ही नहीं बल्कि देश भर के सबसे पुराने पेड़ों में से एक है। कृषि और बागवानी विशेषज्ञ द्वारा इस पेड़ को “ऐतिहासिक पेड़” की श्रेणी में रखने पर काम किया जा रहा है। इससे कर्नाटक के जनगेरे गांव, मगदी तालुक स्थित यह पेड़ अब सुर्खियों में है। इस पेड़ की ऊंचाई 19.5 मीटर और चौड़ाई 6.5 मीटर है। इसे देखने दूर दूर से लोग आते हैं। ये पेड़ इतना घना है और फलदार है कि हर साल गर्मियों में आज भी लोग इसके फल लेने आते हैं। यहाँ और पढ़ें

8. चाय की कीमतों में गिरावट, चाय उत्पादक परेशान

चाय की कीमतों में लगातार गिरावट हो रही है। लेकिन उसके उत्पादन में लगने वाली लागत लगातार महंगी होती जा रही है। ऐसे में चाय उगाने वालों के लिए लागत और बिक्री के बीच का मार्जिन लगातार कम होता जा रहा है। हालांकि, जो उत्पादक अच्छी क्वालिटी की चाय के उत्पादन पर ध्यान दे रहे है, उन्हें उतनी गिरावट देखने को नहीं मिलेगी। असम और दोआर के 50 मुख्य चाय बगान में चाय की औसत नीलामी कीमतों में सिर्फ 9% की गिरावट आई है। जबकि 2021-22 के पहले छह महीने के दौरान यह संख्या 25% थी। यहाँ और पढ़ें

9. RGICL का फसल बीमा से इंकार

रिलायंस जनरल इंश्योरेंस कंपनी (RGICL) ने खरीफ 2021 सीजन के लिए केंद्रीय फसल बीमा योजना के तहत महाराष्ट्र के किसानों को बीमा दावों का भुगतान करने से इनकार कर दिया है। इस वजह से राज्य सरकार ने केंद्र को इस मुद्दे को कानून-व्यवस्था का मुद्दा बताते हुए एक पत्र लिखा हैै। अन्य पांच बीमा कंपनियों ने मध्य-मौसम और स्थानीय आपदा दावों का लगभग 90% भुगतान कर दिया है। राज्य के मुख्य सांख्यिकीय अधिकारी (कृषि) विनय कुमार आवटे ने कहा कि रिलायंस ने दावा गणना प्रक्रिया भी पूरी नहीं की है। यहाँ और पढ़ें

10. चार्ज ERP ने उग्राही रजिस्टर लॉन्च किया

भारत के सबसे आसान, तेज़ और सुरक्षित मंडी एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर, चार्ज ERP ने हाल ही में एक नई रिपोर्ट पेश की है जिसका नाम उग्राही रजिस्टर है। यह रिपोर्ट ‘बिल और रिपोर्ट’ सेक्शन से निकाली जा सकती है। उग्राही रजिस्टर का उद्देश्य ग्राहकों के क्लोजिंग बैलेंस के साथ-साथ यह दिखाना है कि वे अपने वर्तमान मूल्य पर कैसे आए है। यह रिपोर्ट ‘ओपनिंग बैलेंस’, ‘क्लोजिंग बैलेंस’, डेबिट (Dr) मूल्य और क्रेडिट (Cr) मूल्य जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी दिखाती है।

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