बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम के बारें में जानें

बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम के बारें में जानें बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम के बारें में जानें

भारत बागवानी फसलों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। यह विश्व के 10.9% फलों और 8.6% सब्जियों का उत्पादन करता है। इसके बावजूद दुनिया के बागवानी निर्यात में भारत की हिस्सेदारी सब्जियों में 1.7% और फलों में 0.5% है। इस गंभीर असमानता को दूर करने के लिए सरकार द्वारा बागवानी क्लस्टर विकास कार्यक्रम (सीडीपी) शुरू किया गया है।

हाल ही में कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय (MoA&FW) ने भारत में बागवानी क्षेत्र के सम्पूर्ण विकास के लिए बागवानी सीडीपी शुरू की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य बागवानी समूहों (क्लस्टर) का विकास करना और उन्हें विश्व स्तर पर पहचान दिलाना है। शुरूआती चरण में, यह कार्यक्रम चुने गए 53 बागवानी समूहों में से 12 में लागू किया गया है। इसके बारे में विस्तार से बताते हैं –

बागवानी सीडीपी योजना क्या है ?

  • बागवानी क्षेत्र के सम्पूर्ण विकास के लिए, इस कार्यक्रम में उत्पादन, कटाई, लॉजिस्टिक, मार्केटिंग और ब्रांडिंग जैसे सभी पहलुओं को शामिल किया गया है।
  • बागवानी सीडीपी किसानों सहित सभी हिस्सेदारों को साथ लाता है और सुनिश्चित करता है कि हर किसी के लिए सारे संसाधन उपलब्ध हों। इससे लगभग 10 लाख किसानों को फायदा हो सकता है। साथ ही उनकी आय भी दोगुनी होने की उम्मीद है।
  • यह बागवानी समूहों को विश्व स्तर पर योग्य बनाता है। साथ ही क्लस्टर-विशिष्ट ब्रांड तैयार करता है जिससे लक्षित फसलों के निर्यात में लगभग 20% तक का सुधार हो सकता है।
  • विशिष्ट फलों और सब्जियों की खेती के लिए अलग-अलग क्लस्टर होते हैं। अब तक जिन समूहों को चुना गया है उनमें आम के लिए लखनऊ (यूपी), कच्छ (गुजरात), और महबूबनगर (तेलंगाना),  सेब के लिए शोपियां (जम्मू-कश्मीर) और किन्नौर (हिमाचल) आदि शामिल हैं।
  • इस कार्यक्रम से 10,000 करोड़ रुपये के निवेश को आकर्षित करने की उम्मीद की जा रही है। लेकिन ये निवेश सभी 53 समूहों में सीडीपी के लागू हो जाने के बाद ही किया जाएगा।

बागवानी सीडीपी से क्या उम्मीदें हैं ?

बागवानी सीडीपी एक सुविचारित योजना है। हालांकि इसकी सफलता विभिन्न बातों पर निर्भर करती है। इनमें से एक है कि विशिष्ट समूहों में किसानों, उत्पादकों, एफपीओ, एजेंसियों और निर्यातकों सहित सबकी भागीदारी होनी चाहिए। इसके अलावा उच्चत्तम इंफ्रास्ट्रक्चर, पैकेजिंग, भंडारण सुविधाएं और सख्त गुणवत्ता मानकों का पालन होना चाहिए।

पिछले वर्षों में बागवानी क्षेत्र में काफी क्षमता देखी गई है। बागवानी उत्पादन 2001-02 में 14.6 करोड़ टन से दोगुना होकर 2018-19 में 31.4 करोड़ टन हो गया है और आगे इसके और भी बढ़ने की उम्मीद है। फलों और सब्जियों के उत्पादन का इतनी तेज़ी से बढ़ना उसकी आपूर्ति श्रृंखला (सप्लाई चेन) पर कई सवाल खड़े कर देता है। 

ज्यादा उत्पादन को सही तरीके से मैनेज करना काफी जरुरी होता है। क्योंकि इस उपज को बेचने के लिए मंडियों में ले जाया जाता है, यहाँ कमीशन एजेंट का किरदार भी अहम हो जाता है। कमीशन एजेंट मंडियों में ग्राहकों और विक्रेताओं के बीच मध्यस्थ के रूप में कार्य करते हैं। वह दोनों पक्षों को एक बेहतर सौदा दिलाने में मदद करते हैं और अपने मंडी सॉफ्टवेयर में इसका ट्रैक भी रखते हैं। आज कई कमीशन एजेंट अपने दैनिक लेनदेन के रिकॉर्ड को रखने के लिए चार्ज ERP पर भरोसा कर रहे हैं। 

चार्ज ERP भारत का सबसे आसान, तेज़ और सुरक्षित ऑनलाइन एकाउंटिंग प्लेटफार्म है। इसे भारत की नंबर 1 कृषि-व्यापार ऐप बीजक द्वारा तैयार किया गया है। यह एक क्लाउड-आधारित सॉफ्टवेयर है जो एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की वजह से काफी सुरक्षित है। इस एकाउंटिंग प्लेटफॉर्म से आढ़तिये अपने काम करने के समय को 90% तक कम कर सकते हैं। इसके कुछ प्रमुख लाभ हैं:

  • कहीं से भी इस्तेमाल करें
  • डेटा पर 100% नियंत्रण रखें
  • डेटा की सुरक्षा की गारंटी
  • टीम को कहीं भी बैठे मैनेज करें 
  • क्षेत्रीय भाषा का सहयोग पाएं
  • कई उपकरणों से इस्तेमाल करें
  • इंवेटरी आसानी से मैनेज करें
  • वाट्सऐप पर रिपोर्ट शेयर करें  
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