फसल के बाद प्रबंधन का महत्व

फसल के बाद प्रबंधन का महत्व फसल के बाद प्रबंधन का महत्व

भारत दुनिया के सबसे बड़े कृषि उत्पादक देशों में से एक है। यहाँ बड़ी तादाद में चावल, गेहूँ, कपास, गन्ना, मूँगफली, मसाले, फल और सब्ज़ियाँ आदि उगाई जाती हैं। हालांकि फसलों के बाद की प्रबंधन सुविधाओं के मामले में हम अब भी काफी पीछे हैं। उत्पादन के बाद कृषि उत्पादों को कई गतिविधियों से होकर गुज़रना पड़ता है। हर चरण में नुकसान होने की संभावना बनी रहती है और कहीं न कहीं इससे उनके वितरण में भी परेशानी आती है। इसलिए फसल उत्पादन के बाद की सुविधाओं पर विचार करना ज़रूरी है। 

फसल के बाद प्रबंधन का महत्व

CIPHET की 2018-19 की एनुअल रिपोर्ट की मानें, तो फसलों के बाद प्रबंधन आज भारत के लिए एक बड़ी चुनौती है। वर्तमान में करीब 6% अनाज, 8% दलहन, 10% तिलहन और 15% फल और सब्ज़ियाँ फसलों के बाद बेहतर प्रबंधन के अभाव में नष्ट हो जाती हैं। चौंकाने वाली बात ये है कि इससे वार्षिक आधार पर करीब ₹ 1 लाख करोड़ का नुकसान होता है। हालांकि फसलों के बाद अपनाई जाने वाली उपयुक्त गतिविधियों के ज़रिए इस नुकसान को कम किया जा सकता है।

फसल के बाद प्रबंधन के चरण

  • सफाई और छँटनी
  • उत्पादों की धुलाई और उन्हें सुखाना
  • ग्रेडिंग (श्रेणीकरण)
  • प्री-कूलिंग
  • पैकेजिंग
  • रेफ्रिजरेशन
  • भंडारण
  • परिवहन
  • मार्केटिंग और वितरण

फायदे

सफाई, छँटनी, ग्रेडिंग, भंडारण और परिवहन जैसी फसलों के बाद की गतिविधियाँ कृषि उत्पादों की गुणवत्ता को बरकरार रखने के लिए बेहद ज़रूरी हैं। इससे उत्पाद की बनावट, स्वाद और क्वालिटी खराब नहीं होती है। साथ ही खाद्य उत्पाद सुरक्षित रहते हैं। इससे उनकी शेल्फ लाइफ यानी कि उत्पाद के भंडार और उपयोग होने की अवधि में भी इज़ाफा होता है। साथ ही पोषक तत्व भी बरकरार रहते हैं। 

तकनीक की भूमिका

फसलोें के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसमें उत्पादों के रखरखाव, पैकेजिंग, भंडारण और परिवहन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और मशीनरी आदि पर ज़ोर दिया जाता है। इसके तहत थर्मल प्रोसेसिंग, परिरक्षण (प्रिज़रवेशन) तकनीक, ड्राइंग प्रोसेस और केमिकल और बायोलॉजिकल रिएक्शन जैसी गतिविधियाँ शामिल होती हैं जो उत्पादों की भंडारण क्षमता को बढ़ाते हैं। 

इन तकनीकों का इस्तेमाल कर फसलों के बाद होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। साथ ही उपभोक्ताओं को बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद प्रदान किए जा सकते हैं। कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक फसलों के बाद की गतिविधियों के लिए अपनाई जाने वाली तकनीक नए ग्रामीण उद्योग खड़े करने में मदद कर सकती है।

जैसा कि ये बात साफ है फसलों के बाद होने वाले नुकसान को कम करने में तकनीक काफी मददगार है। इसलिए उपलब्ध तकनीकों की उपयोगिता को समझना भी ज़रूरी है। आप चाहें, तो अलग-अलग क्षेत्रों में तकनीक का इस्तेमाल कर सकते हैं। अगर आप एक कमीशन एजेंट हैं, तो आपको चार्ज ERP जैसी अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करना चाहिए जिससे आप अपना 90% तक का समय बचा सकते हैं। यह क्लाउड आधारित ऑनलाइन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर मंडी एकाउंटिंग को बिल्कुल आसान बना देता है।

चार्ज ERP के इस्तेमाल से कमीशन एजेंट (आढ़तिये) अपने रोज़मर्रा के काम आसानी से पूरे कर सकते हैं। इसकी मदद से वे बिल और रिपोर्ट तैयार कर सकते हैं, आवक और डेली सेल की एंट्रियाँ तैयार कर सकते हैं। साथ ही अपने टीम मेंबर्स के साथ मिलकर काम कर सकते है। इन सबके अलावा वे अपना अकाउंट कहीं से भी इस्तेमाल कर सकते हैं और व्हाट्सऐप पर रिपोर्ट शेयर कर सकते हैं।

इसलिए बिना देर किए +91 9311341199 पर कॉल करके अपना फ्री डेमो बुक करें। अधिक जानकारी के लिए आप www.chargeerp.com पर विज़िट भी कर सकते हैं।