भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को सरकार कैसे मजबूत कर रही है

How the Government Is Strengthening India’s Food Processing Sector भारत के खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को सरकार कैसे मजबूत कर रही है

खाद्य प्रसंस्करण (फ़ूड प्रोसेसिंग) क्षेत्र किसानों और उपभोक्ताओं को आपस में जोड़ने की महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खाद्य प्रसंस्करण हमारे वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में 13% का योगदान देता है। पैक करे हुए खाद्य उत्पादों की बढ़ती हुई मांग इस बात का प्रमाण है कि यह क्षेत्र मंदी और महामारी से भी प्रभावित नहीं हुआ। भारत सरकार विभिन्न तरीकों से FPI का समर्थन कर रही है।

FPI को मज़बूत करने के लिए भारत सरकार द्वारा लिए गए कदम

1. खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के लिए उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन योजना (PLISPI)

भारत सरकार ने प्रधान मंत्री के ‘आत्मनिर्भर भारत‘ के मिशन के अनुसार PLISPI योजना को मंजूरी दी है। यह योजना 2021-22 से 2026-27 तक लागू की जाएगी। इसे कुल ₹10,690 करोड़ का बजट दिया गया है। PLISPI खाद्य प्रसंस्करण (फ़ूड प्रोसेसिंग) कंपनियों को उनके इंफ्रास्ट्रक्चर को नया बनाने और उच्च क्षमता वाले उत्पादों के निर्माण के लिए प्रोत्साहन प्रदान करेगी। यह योजना खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों, सहकारी समितियों और छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए बनी है। 

2. पीएम फॉर्मलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज स्कीम (PMFME)

यह योजना जून 2020 में “आत्मनिर्भर भारत अभियान” के तहत राज्य सरकारों के साथ शुरू की गई थी। PMFME का उद्देश्य मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को आगे बढ़ाना है। साथ ही उनपर कुछ नियम और कानून लगाकर उन्हें औपचारिक बनाना है। यह योजना 2020-21 में लागू की गई थी। इसे कुल ₹10,000 करोड़ का बजट दिया गया था। इस कार्यक्रम से 2,00,000 सूक्ष्म उद्यमों को लाभ होने की उम्मीद करी जा रही है। फ़िलहाल यह 35 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में लागू हो चुकी है।

3. महिला उद्यमियों को समर्थन

महिलाओं को सशक्त बनाना हमेशा से ही भारत सरकार का प्रमुख उद्देश्य रहा है। इसी इरादे के साथ, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (MOFPI) ने महिला और बाल विकास मंत्रालय के साथ साझेदारी में एक ‘जैविक खाद्य महोत्सव‘ का आयोजन किया। फरवरी 2020 में नई दिल्ली में किए गए इस आयोजन में 180 से भी अधिक महिला उद्यमियों ने भाग लिया। महिलायों को वहा फसल कटाई के बाद का प्रबंधन, पैकेजिंग जैसे प्रशिक्षण भी दिए गए। आज के समय में पंजीकृत खाद्य प्रसंस्करण में महिलाओं की 12.55% भागीदारी है।

4. संस्थानों और अकादमियों को मजबूत बनाना

वर्तमान में MOFPI के दो प्रमुख संस्थान हैं, अर्थात् IIFPT (इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ फूड प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी) और NIFTEM (नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़ूड टेक्नोलॉजी, एन्त्रप्रेंयूर्शिप और मैनेजमेंट)। 2021 में संसद द्वारा एक बिल पास होने के बाद, यह दोनों राष्ट्रीय महत्व के संस्थान (INI) बन गए हैं। यह कदम इन संस्थानों को विश्व स्तरीय शिक्षा प्रदान करने में सक्षम बनाएगा। भारत में राष्ट्रीय महत्त्व के संसथान वह होते है जो विशेष क्षेत्रो में कुशल कर्मियों को तैयार करते है ।

5. अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना (R&D)

भारत के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने FPI के अनुसंधान और विकास के लिए निरंतर सहायता प्रदान की है। इसी वजह से भारत में  आज 126 अनुसंधान एवं विकास परियोजनाएं चल रही हैं। ये विभिन्न क्षेत्रों जैसे की प्रक्रिया विकास, पैकेजिंग, प्रौद्योगिकी के उपयोग आदि पर काम करती हैं। R&D की मदद से भारत में अभी तक 15 पेटेंट दर्ज हुए हैं। इसके अलावा 20 प्रौद्योगिकियों को मार्किट में लाया गया है। साथ ही 187 रिसर्च की खोजें प्रकाशित की गई हैं।

एक अच्छी तरह से विकसित खाद्य प्रसंकरण (फ़ूड प्रोसेसिंग) क्षेत्र, किसी भी देश में खाना व्यर्थ होने की समस्या को हल कर सकता है। साथ ही किसानों के लिए बेहतर रिटर्न भी सुनिश्चित कर सकता है। यही वजह है की भारत सरकार FPI को आगे बढ़ाने ले लिए हर संभव कोशिश कर रही है।

FPIs अपने कच्चे माल की जरूरतों को पूरा करने के लिए कृषि बाजारों या मंडियों पर निर्भर होती हैं। ऐसे उद्योग किसानों की उपज को कमीशन एजेंटों से थोक में खरीदते हैं। इन बिक्रियों का हर रोज़ का हिसाब रखने के लिए कृषि व्यापारियों को किसी मंडी अकॉउंटिंग सॉफ्टवेर की आवश्यकता होती है। चार्ज ERP एक ऑनलाइन अकॉउंटिंग प्लेटफार्म है जो सुरक्षित, उपयोग करने में आसान और कमीशन एजेंटों को अपने सभी खरीदारों पर नज़र रखने के लिए बनाया गया है।

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