भारत में कृषि उद्यमिता

भारत में कृषि उद्यमिता भारत में कृषि उद्यमिता

भारतीय अर्थव्यवस्था की मज़बूती के पीछे कृषि का महत्वपूर्ण योगदान है। चूँकि हम ‘कृषि उद्यमिता’ को संधारणीय विकास के एक प्रमुख साधन के रूप में अपना रहे हैं, यह ज़रूरी हो जाता है कि हम इस क्षेत्र की चुनौतियों और अवसरों को भी जान लें। हालांकि बीते कुछ समय में हमने कई उपलब्धियाँ हासिल की हैं, मगर उत्पादकता और मुनाफे में कमी की समस्या अब भी बनी हुई है। इसलिए आगे बढ़ने से पहले हमारा इस क्षेत्र को जानना बहुत ज़रूरी है।

कृषि उद्यमिता पर एक नज़र

यह कृषि उत्पादों के उत्पादन और विक्रय से जुड़ा एक शब्द है। इसमें कृषि क्षेत्र से जुड़ी तकनीक और नवाचार के अतिरिक्त मैनेजमेंट स्किल्स भी शामिल होते हैं। कृषि उद्यमिता के ज़रिए कृषि व्यवसाय का मुनाफा बढ़ाने में मदद मिलती है। यहाँ तक कि यह देश में गरीबी को दूर करने में भी मददगार हो सकता है। इसके अलावा इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मज़बूती भी मिलती है। सरल शब्दों में कहें, तो कृषि उद्यमिता को विकास के एक संधारणीय माध्यम के रूप में देखा जा सकता है।

कृषि उद्यमिता के नए क्षेत्र

कृषि उद्यमिता का क्षेत्र काफी विशाल है। हालांकि इन्हें 4 भागों में बाँटा जा सकता है –

  • कृषि उत्पादक: इसके तहत उत्पादकों को एक उद्यम के तौर पर देखा जाता है। ये नवीन तकनीकों का इस्तेमाल कर उत्पादन बढ़ाने पर ज़ोर देते हैं और बाज़ार की मांग को पूरा करते हैं।
  • सेवा प्रदाता: इसमें ट्रैक्टर और स्प्रेयर जैसे कृषि उपकरणों का आदान-प्रदान व वितरण शामिल होता है। इसके अलावा खरपतवार नियंत्रण, पशुपालन, पशु आहार, सिंचाई और भंडारण संबंधी सुविधाएँ भी इसका अहम हिस्सा होती हैं। 
  • आदान उत्पादक: इसमें जैव कीटनाशक, जैव उर्वरक, केंचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) और कृषि उपकरणों आदि का उत्पादन शामिल होता है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले छोटे उद्यमी भी इस काम को पूरा कर सकते हैं। 
  • प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) और विक्रय:  इन कामों के लिए बड़ा निवेश चाहिए होता है। साथ ही सब कुछ व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया जाता है। सामान्यतः इसके लिए योग्य और कुशल व्यक्तियों की आवश्यकता होती है।

कृषि उद्यमिता के लाभ

  • कृषि उत्पादकता में वृद्धि
  • रोज़गार सृजन
  • ग्रामीण विकास
  • व्यापार के लिए नए अवसरों का निर्माण
  • पलायन में कमी
  • अर्थव्यवस्था को मज़बूती

कुछ चुनौतियाँ:

  • उद्यमिता कौशल में कमी
  • ऋण संबंधी समस्याएँ
  • प्रशिक्षण का अभाव
  • कमज़ोर सौदेबाज़ी 
  • आर्थिक अस्थिरता

सरकारी पहल

कृषि क्षेत्र में संभावनाओं को ध्यान में रखकर भारत सरकार कृषि उद्यमिता के लिए एक बेहतर वातावरण तैयार करने का प्रयास कर रही है। वर्ष 2018-19 में भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने “नवाचार और कृषि उद्यमिता” नाम के एक कार्यक्रम की शुरुआत की। इसे राष्ट्रीय कृषि विकास योजना(रफ़्तार) के एक अंग के रूप में लॉन्च किया गया था। कृषि क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ही इस कार्यक्रम को शुरू किया गया था। इसके तहत कृषि और संबंधित क्षेत्रों से जुड़े स्टार्ट-अप्स को सरकार द्वारा वित्तीय मदद प्रदान किए जाने का प्रावधान है। 

पीआईबी की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस कार्यक्रम के तहत सरकार ने करीब 346 स्टार्ट-अप्स को फंड मुहैया कराया है। इसके अलावा सरकार ने एग्री-फूड टेकाथॉन का आयोजन भी किया ताकि नए आइडियाज़ को बढ़ावा दिया जा सके।

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हमारा मानना है कि भारतीय कृषि क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा देकर नई उपलब्धियाँ हासिल की जा सकती हैं। संधारणीय और समुदाय आधारित उद्यमों के ज़रिए ग्रामीण भारत में नए अवसर तलाशे जा सकते हैं। भारतीय स्टार्टअप्स अर्थव्यवस्था को मज़बूती प्रदान करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।