एमएसपी: किसानों के जीवन को मिल रही है आर्थिक स्थिरता

Providing Financial Stability To Farming Community MSP provides financial stability to the farming community

हमारे देश की संपन्नता का एक बड़ा कारण हमारे ‘किसान’ हैं। ये फसल उगाते हैं, तब जाकर देशवासियों को रोटी मिलती है। हालांकि दुख इस बात का है कि हमारे देश में किसानों की संपन्नता के कारण बहुत ही निम्न हैं। हाँ, मगर ये ज़रूर कहा जा सकता है कि इनमें से कुछ वाकई बहुत खास हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) इन्हीं में से एक है जो हमारे किसानों के जीवन को मज़बूती प्रदान करता है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)

न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) किसानों द्वारा बेचे जाने वाले कृषि उत्पादों के लिए एक न्यूनतम कीमत की गारंटी है। इससे किसानों को नुकसान होने की संभावना कम हो जाती है। दशकों से एमएसपी किसानों के बुरे वक्त में उनका सहारा रहा है। इसने हर बार किसानों को आर्थिक अस्थिरता से उबरने में मदद की है।

यहाँ बताना ज़रूरी है कि एमएसपी से कृषि उत्पादों के लिए एक न्यूनतम कीमत तय हो जाती है। इसके बाद उस तय कीमत से कम में किसानों से किसी भी उत्पाद की खरीद नहीं की जा सकती है। इससे ये फायदा होता है कि बाज़ार में उत्पादों की बिक्री के दौरान कोई किसानों का शोषण नहीं कर पाता है और वे सही दाम पर अपने उत्पाद बेच पाते हैं। यदि, किसी कारणवश बाज़ार में उन्हें अपने उत्पादों का सही दाम नहीं भी मिलता है, तो भी उनके पास यह विकल्प होता है कि वे सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर अपने उत्पाद बेच सकें। 

एमएसपी का इतिहास

आज़ादी के बाद, भारत में कृषि उत्पादन की स्थिति ज़्यादा अच्छी नहीं थी। साथ ही किसानों को भी उनके उत्पादों के लिए सही दाम नहीं मिलते थे। वो बेचारे अपना समय, पैसा, मेहनत सब कुछ खेती-किसानी में लगा देते थे, लेकिन उन्हें आशानुरूप नतीजे देखने को नहीं मिलते थे। यहाँ तक कि कई बार उन्हें रोज़ी-रोटी के लिए भी तरसना पड़ता था। चूँकि कृषि उत्पादों की खरीद राज्यों से आने वाली मांग पर निर्भर थी, किसानों को कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। 

जब कृषि उत्पादन कम होता था, तो उत्पादों के दाम बढ़ जाते थे। वहीं, जब उत्पादन ज़्यादा होता था, तो उत्पादों के दाम में बहुत ज़्यादा गिरावट आ जाती थी। इस वजह से किसानों को आर्थिक अस्थिरता का सामना भी करना पड़ता था। आलम ये था कि खेती-किसानी से किसानों का मोह ही भंग होने लगा था। जब हालात बिगड़ने लगे तो नीति निर्माताओं की नींद खुली और उन्होंने कृषि सुधारों की दिशा में अपने कदम बढ़ाए। तब जाकर एसएसपी अस्तित्व में आया। 

अंततः कई कमीटियों के गठन और उनके सुझावों के बाद 1966-67 में गेहूँ और धान के लिए एमएसपी तय की गई। इससे किसानों का मनोबल तो बढ़ा ही, साथ ही कीमतों के उतार-चढ़ाव पर लगाम लगाने में भी मदद मिली। इस तरह किसानों के जीवन को वह स्थिरता मिली, जिनके वे हकदार थे। 

एमएसपी के फायदे

  • किसानों के जीवन को आर्थिक स्थिरता मिलती है।
  • कृषि व्यवस्था मज़बूत होती है।
  • किसान उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
  • आगामी उत्पादन और आय का अंदाज़ा लग पाता है।
  • मांग और आपूर्ति में होने वाले बदलावों से उबरने में मदद मिलती हैं।

ऐसे तय करते हैं एमएसपी

भारत में मुख्यतः फसलों के दो ही मौसम हैं- रबी और खरीफ। इन्हें ध्यान में रखकर ही एमएसपी तय की जाती है। हर मौसम की शुरुआत में सरकार एमएसपी की घोषणा कर देती है। एमएसपी तय करने का ज़िम्मा कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) के ज़िम्मे है। आयोग कुछ पूर्व निर्धारित फॉर्मूला व नियमों के आधार पर सरकार को एमएसपी तय करने का सुझाव देता है। इसके लिए कुछ तकनीकी पहलुओं का भी ध्यान रखा जाता है। आयोग से मिलने वाले सुझावों पर गौर करने के बाद सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी कि एमएसपी का निर्धारण करती है।

एमएसपी के तहत आने वाली फसलें

वर्तमान में करीब 23 फसलें एमएसपी के दायरे में आती हैं। सरकार इन फसलों के लिए एमएसपी तय करती है। बाजरा, धान, जौ, रागी, ज्वार जैसे अनाज के अलावा मूंग, मसूर, अरहर, उड़द सरीखे कुछ दलहनों पर भी सरकार एमएसपी तय करती है। यहाँ तक कि सरसों, मूँगफली और सोयाबीन जैसे कई तिलहन भी एमएसपी के दायरे में आते हैं। 

बीते 10 साल में सरकार द्वारा तय की गई एमएसपी 

2010-2011 से 2021-2022 के बीच खरीफ फसल के लिए तय की गई एमएसपी – ( ₹ प्रति क्विंटल

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2010-2011 से 2021-2022 के बीच खरीफ फसल के लिए तय की गई एमएसपी

2010-2011 से 2021-2022 के बीच रबी फसल के लिए तय की गई एमएसपी ( ₹ प्रति क्विंटल

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2010-2011 से 2021-2022 के बीच रबी फसल के लिए तय की गई एमएसपी

Source: farmer.gov.in

मंडियों में बेहतर दाम दिलाने में मददगार है एमएसपी

जैसा कि आप जानते हैं कि एमएसपी में फसलों के लिए एक न्यूनतम कीमत तय कर दी जाती है। लिहाज़ा, किसानों को इसका भरपूर लाभ मिलता है। मंडी व्यापारियों द्वारा उनके उत्पाद बेहतर दामों में खरीदे जाते हैं। एमएसपी की वजह से ही यह संभव हो पाता है। यदि व्यापारी एमएसपी से बेहतर दामों में उत्पाद नहीं खरीदेंगे, तो किसान अपने उत्पाद बेचने के लिए सरकारी एजेंसियों के पास चला जाएगा। ऐसी स्थिति में व्यापारियों को नुकसान होगा, जो वो कभी नहीं चाहेंगे। 

वैसे भी मंडी व्यवस्था के चलते किसानों को अपने उत्पाद बेचने में काफी आसानी होती है। कमीशन एजेंट (आढ़तिये) उनकी ये मुश्किल काफी हद तक दूर कर देते हैं। वे किसानों के उत्पाद को बेहतर दामों में बेचने में मदद करते हैं जिससे उन्हें भी अच्छा कमीशन मिल जाता है। इससे व्यापार में शामिल सभी हितग्राहियों का काम बन जाता है। किसान का उत्पाद बिक जाता है, व्यापारी को उत्पाद मिल जाता है और कमीशन एजेंट  (आढ़तियों) को उनका कमीशन मिल जाता है। 

मंडी की बात से याद आया कि मंडी के व्यापारियों, खासकर कमीशन एजेंट्स (आढ़तियों) के सामने कई तरह की चुनौतियाँ होती हैं। एकाउंटिंग जैसे काम में लगने वाला वक्त इन्हीं चुनौतियों में से एक है। लेकिन अच्छी बात ये है कि आज चार्ज ERP जैसा एक दमदार ऑनलाइन एकाउंटिंग सॉफ्टवेयर मौजूद है, जो उनकी इस मुश्किल को दूर करने में मदद करता है।  

चार्ज ERP का मंडी कनेक्शन

आपको बता दें कि चार्ज ERP को देश के नंबर 1 एग्रीट्रेडिंग ऐप बीजक द्वारा तैयार किया गया है। मंडी व्यापारियों, विशेषकर कमीशन एजेंट्स (आढ़तियों) की एकाउंटिंक संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ही इसे डिज़ाइन किया गया है। इससे उनके रोज़मर्रा के एकाउंटिंग से जुड़े कार्य आसान हो जाते हैं और वे अपना कीमती समय बचा पाते हैं। चार्ज ERP में ऐसे ढेरों फीचर्स हैं, जिससे एकाउंटिंग से जुड़े काम कुछ ही मिनटों में पूरे हो जाते हैं। आइए, उनमें से कुछ खास फीचर्स के बारे में जानते हैं – 

  • इसकी मदद से आप अपना 90% तक समय बचा पाते हैं।
  • आप किसी भी डिवाइस से इसे एक्सेस कर सकते हैं।  
  • इसमें एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन की सुविधा मिलती है।  
  • डेटा सुरक्षित रखने के लिए क्लाउड टेक्नोलॉजी का उपयोग किया गया है।
  • इसके लिए किसी खास तकनीकी या एकाउंटिंग दक्षता की ज़रूरत नहीं है।
  • सबसे खास बात, यह एक किफायती विकल्प है।

 
सारांश– चार्ज ERP कमीशन एजेंट (आढ़तियों) की एकाउंटिंग संबंधी ज़रूरतों को पूरा करने के साथ-साथ उनका कीमती वक्त भी बचाता है। देखा जाए तो आज चार्ज ERP देश के तकनीक आधारित सबसे बड़े प्लेटफॉर्म्स में से एक है। देश भर के कमीशन एजेंट (आढ़तिये) इस पर भरोसा करते हैं। तो फिर आप क्यों पीछे हैं? अगर आप एक कमीशन एजेंट हैं, जो अकाउंटिंग में लगने वाले समय को कम करना चाहते हैं और व्यापार में ज़्यादा समय बीताना चाहते हैं तो www.chargeerp.com पर साइन-अप करें या +91 9311341199 डायल करें और आज ही अपना फ्री-डेमो बुक करें ।